Kanphool

Kanphool Uttarakhand

कनफूल या कर्णफूल एक पारम्परिक पहाड़ी बाली है जिसका शाब्दिक अर्थ है कान का फूल ,एक कान की बाली कानों में लगाए गए गहनों का एक टुकड़ा है जो कान के निचले छेद में या कान के दूसरे बाहरी हिस्से  को छोड़कर कान से जुड़ा होता है।

दूसरे शब्दों में कहा जाये तो कर्णफूल भी झुमका या कानो में पहनी जाने वाली बाली का ही एक रूप है। यह एक लबा झुमका ही होता है, जिसके बीच में नग लगे होते है। एक प्रकार से पुरे कान को ढक्क लेता है।

 

  • समान्यतः इसका वजन ५ से १० ग्राम तक होता है। इसे लोग अपनी सामर्थ्य के हिसाब से बनवाते थे।
  • इसे चाँदी की धातु से बनवाया जाता था,क्योंकी पहले लोग संपन्न नहीं थे, और सोने की धीरे धीरे इसे सोने से बनवाने का रिवाज़ चलने लगा।
  • महिलाये कर्णफूल को किसी भी आयोजन और धार्मिक अनुष्ठान में पहनने के साथ साथ और दैनिक जीवन में भी पहनती थी।
  • कर्णफूल के डिजाइन को समय के साथ परिवर्तित किया जाता रहा है, और इसी कारण जैसे उसका प्रारूप था ,वो अब उससे थोड़ा भिन्न भी दिखाई देने लगा।
  • देखने में ये भी बिलकुल कर्णफूल जैसे ही लगते थे, और इस प्रकार नए पीढ़ी के डिजायनो में झुमका ने भी बहुत से आकर ले लिए , और कर्णफूल एक प्रकार से पहाड़ी आभूषणों में लुप्त सा हो गया।
  • वैसे इसे पुराने लोगो के पास ही देखा जा सकता है, वह भी पारम्परिक आभूषण के रूप में क्योंकी यह भी बहुत परिवर्तन से गुजर कर भिन्न हो गए है। समय के साथ कर्णफूल का स्थान झुमको ने ले लिया।
  • भले ही कर्णफूल में परिवर्तन आकर इसका स्वरुप बदल गया है। परन्तु कर्णफूल की विशेष आकृति इसे पारम्परिक आभूषण बनाती है।