Uttarakhand Mahua UK Academe

महुआ एक भारतीय उष्णकटिबंधीय पेड़ है जो मुख्य रूप से मध्य और उत्तर भारतीय मैदानों और जंगलों में पाया जाता है। यह एक तेजी से बढ़ने वाला पेड़ है जो लगभग 20 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ता है, जिसमें सदाबहार या अर्ध-सदाबहार पत्ते होते हैं, यह पर्यावरण के अनुकूल है।

महुआ भारतवर्ष के सभी भागों में होता है और पहाड़ों पर तीन हजार फुट की ऊँचाई तक पाया जाता है। इसकी पत्तियाँ पाँच सात अंगुल चौड़ी, दस बारह अंगुल लंबी और दोनों ओर नुकीली होती हैं। पत्तियों का ऊपरी भाग हलके रंग का और पीठ भूरे रंग की होती है। हिमालय की तराई तथा पंजाब के अतिरिक्त सारे उत्तरीय भारत तथा दक्षिण में इसके जंगल पाए जाते हैं जिनमें वह स्वच्छंद रूप से उगता है। पर पंजाब में यह सिवाय बागों के, जहाँ लोग इसे लगाते हैं और कहीं नहीं पाया जाता। इसका पेड़ ऊँचा और छतनार होता है और डालियाँ चारों और फैलती है। यह पेड़ तीस-चालीस हाथ ऊँचा होता है और सब प्रकार की भूमि पर होता है। इसके फूल, फल, बीज लकड़ी सभी चीजें काम में आती है। इसका पेड़ वीस पचीस वर्ष में फूलने और फलने लगता और सैकडों वर्ष तक फूलता फलता है।

 

 

इसकी पत्तियाँ फूलने के पहले फागुन चैत में झड़ जाती हैं। पत्तियों के झड़ने पर इसकी डालियों के सिरों पर कलियों के गुच्छे निकलने लगते हैं जो कूर्ची के आकार के होते है। इसे महुए का कुचियाना कहते हैं। कलियाँ बढ़ती जाती है और उनके खिलने पर कोश के आकार का सफेद फूल निकलता है जो गुदारा और दोनों ओर खुला हुआ होता है । यही फूल खाने के काम में आता है और 'महुआ' कहलाता है। महुए का फूल बीस वाइस दिन तक लगातार टपकता है। महुए के फूल में चीनी का प्रायः आधा अंश होता है,  इसका प्रयोग हरे और सूखे दोनों रूपों में होता है। हरे महुए के फूल को कुचलकर रस निकालकर पूरियाँ पकाई जाती हैं और पीसकर उसे आटे में मिलाकर रोटियाँ बनाते हैं। जिन्हें 'महुअरी' कहते हैं। सूखे महुए को भूनकर उसमें पियार, पोस्ते के दाने आदि मिलाकर कूटते हैं। इस रूप में इसे लाटा कहते हैं। इसे भिगोकर और पीसकर आटे में मिलाकर 'महुअरी' बनाई जाती है। हरे और सूखे महुए लोग भूनकर भी खाते हैं। गरीबों के लिये यह बड़ा ही उपयोगी होता है। यह गौंओ, भैसों को भी खिलाया जाता है जिससे वे मोटी होती हैं और उनका दूध बढ़ता है। इससे शराब भी खींची जाती है। महुए का फूल बहुत दिनों तक रहता है और बिगड़ता नहीं है।इसका फल परवल के आकार का होता है और 'कलेंदी' कहलाता है। इसे छील उबालकर और बीज निकालकर तरकारी (सब्जी ) भी बनाई जाती है।

  1. हिंदी: महुवा
  2. कन्नड़: हिप्पेगिडा, हिप्पे, हिप्पे, हिप्पेनारा, मधुका, इप्पा, अप्पारा
  3. मलयालम: इरिप्पा, इलिप्पा, इलुप्पा, एलुप्पा
  4. मराठी: मोहदा
  5. उड़िया: महुला
  6. पंजाबी: मौ, महुआ
  7. तमिल: कटिलुप्पई, कट्टू इलुप्पी, इलुप्पी
  8. तेलुगु: लप्पा पुव्वु
  9. उर्दू: महुवा
  10. सिद्ध: इल्लुप्पै
  11. सिंहली: रिपु
  12. फ़ारसी: गुल-ए-चाकन
  • महुआ के पौधे के बीजों को त्वचा रोग और शरीर के दर्द के लिए लाभकारी होता है।
  • महुआ के फूलों के ताजे रस का उपयोग नाक प्रशासन वात-पित्त दोष जैसी बीमारियों में किया जाता है जैसे सिरदर्द, आँखों की जलन आदि।
  • महुआ के सूखे फूलों को दूध में उबाला जाता है , जिससे नसों की कमजोरी दूर होती है।
  • महुआ के पेड़ की छाल का काढ़ा चिड़चिड़ापन आंत्र सिंड्रोम और दस्त के इलाज के लिए उपयोगी है।
  • फूलों का ताजा रस उच्च रक्तचाप, हिचकी और सूखी खांसी के इलाज के लिए में दिया जाता है।
  • महुआ के पौधे के फूलों को दूध में उबाला जाता है और मिश्री के साथ मिलाकर दिया जाता है ताकि शुक्राणुओं की कम संख्या, शीघ्रपतन और प्रसवोत्तर अवधि में कम दूध का उत्पादन किया जा सके।
  • फूल या पौधे की छाल से तैयार ठंडा जलसेक 3की खुराक में दिया जाता है ताकि शरीर में जलन, बुखार और जलन का इलाज किया जा सके।
  • पौधे की फूलों के साथ उबला हुआ ठंडा जलसेक या दूध सामान्य दुर्बलता से पीड़ित रोगियों के लिए उपयोगी है।
  • गठिया के लिए, छाल को पानी में उबालकर तैयार छाल का काढ़ा आंतरिक रूप से लिया जाता है और प्रभावित क्षेत्रों पर बीज का तेल बाहरी रूप से लगाया जाता है।
  • मधुमेह के प्रबंधन के लिए छाल का काढ़ा दिया जाता है।
  • पत्तियों का उपयोग एक्जिमा के उपचार में किया जाता है,और तिल के तेल के साथ लेपित किया जाता है और गर्म किया जाता है। यह एक्जिमा से राहत पाने के लिए प्रभावित क्षेत्र पर बाहरी रूप से लगाया जाता है।
  • स्पंजी और रक्तस्राव वाले मसूड़ों के लिए, तरल छाल के अर्क को पानी के साथ मिश्रित किया जाता है। छाल के अर्क के साथ गरारे करना भी तीव्र टॉन्सिलिटिस (सूजन टॉन्सिल) और ग्रसनीशोथ में उपयोगी है।
  • डायरिया को ठीक करने के लिए छाल के आसव का एक कप मौखिक रूप से दो बार लिया जाता है।
  • दर्द को कम करने के लिए बीज के तेल की मालिश बहुत प्रभावी उपाय है।
  • महुआ के फूल बहुत पौष्टिक होते हैं और सामान्य टॉनिक के रूप में लिए जाते हैं। इस उद्देश्य के लिए, सूखे फूल के पाउडर को घी और शहद के साथ खाया जाता है।
  • इसके तेल का प्रयोग (सामान्य तापमान पर ठोस) त्वचा की देखभाल, साबुन या डिटर्जेंट का निर्माण करने के लिए और वनस्पति मक्खन के रूप में किया जाता है।
  • ईंधन तेल के रूप में भी इसका प्रयोग किया जाता है। तेल निकलने के बाद बचे इसके खल का प्रयोग जानवरों के खाने और उर्वरक के रूप में किया जाता है।
  • इसके सूखे फूलों का प्रयोग मेवे के रूप में किया जा सकता है।
  • इसके फूलों का उपयोग भारत के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में शराब के उत्पादन के लिए भी किया जाता है।
  • कई भागों में पेड़ को उसके औषधीय गुणों के लिए उपयोग किया जाता है, इसकी छाल को औषधीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग किया जाता है। कई आदिवासी समुदायों में इसकी उपयोगिता की वजह से इसे पवित्र माना जाता है।

 

 

Kingdom Plantae 
Division Tracheophyta
Subdivision Spermatophytina   
Class Magnoliopsida  
Order  Ericales
Family  Sapotaceae 
Genus  Madhuca Buch.    
Species  Madhuca longifolia