Myaar Kameda Aakhar

Uttarakhand Myaar_Kameda_Aakhar UK Academe

म्यार ददा न सन्दूण तख्ता चिरी कन
वे तै बंसूलु लछे अर रंदा घिसी कन
म्यार बुबा कुणी चिपळी सी पाटी बणायी
यी पाटी मा बुबा, भैजी, मितै गुरुजी लिखण सिखायी।।

वी पाटी मा मील पैल कमेड़ा रिखड़ा खीचींन
वैक बाद तब मील आखर लिखण सीखिन
पाटी तै तवा म्वास पुते कन काळी बणायी
कांच शीशी घुटया लगेकन चम चमकायी।

घुटया लगे कन, ऊंन धागा कमेड़ा रिखड़ा खीचींन
तब जैक मील, बाराखड़ी लिखण सीखिन
गिनती, सुलेख, पहाड़ा सब्बि उखमा बचीन
अपर पुरखु पाटी मा मील पैल कमेड़ा आखर लिखीन।।

दर्जा तीन मा जैकन कॉपी हत्थ पर लेन
बांस कत्त्तदार कलम न सुंदर आखर सजेंन
हैरी नीली स्याही टिक्की घोळीकन दवात भरी
स्कूलया कपड़ा पर स्याही लगे लपड़ा लपोड़ी करी।।

 

 

चिमनी उजळ पर धुंआ मा किताब पढ़ी
स्याही बाना, भुली दगड़ी खूब लड़ी
हस्तकला मा लाल माट क्याला, आम, चखुल बणेन
शिल्पकला मा ब्वान, जूड़ गुरुजी तै देंन।।

संतरा, आंवला दगड्यो तै देकन बीच पन्ना लेन
दगड्यो कॉपी फाड़ी कन नाव अर जहाज चलेंन
पंद्रह अगस्त कुणी प्रभात फेरी लगायी
लड्डू समोसा ना बलकण भिल्ली तोड़ी खायी।।

स्कूल मा लखड़, पाणी खूब सारी
गुरुजी गलत काम मा, सुटकी भी खूब मारी
चोर पुलिस, इच्छी दुच्ची, पिठू, छोपादौड़ी
क्या बतों नादानी मा दगड्यो कपाळ भी फोड़ी।।

दर्जा छै मा कलम छोड़ी, होल्डर न ल्याखी
वेक बाद तब हमन फाउण्टेन पेन राखी
दर्जा दस मा जैकन हमन बॉल पेन द्याखि
उ पैल आखर पाटी मा मील कमेड़ा न ल्याखी।।

 

Harish Kandwal