Buro Sang

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अकुलौ 1 माँ माया 2 करी, कैकी 3 बी नी पार तरी।
बार बिथा सिर थरी , कू रोयेंद ।
जख तख मिसे लांद, झूटा-फीटा सऊँ खंद।
दियुं लेयुं तने जांद, अपजस पायेंद।
आगो पाछो देखी जाणी, खरी खाणी चुप्प चाणी।
किलै कद झुटि स्याणी , गांठी पैसा खोयेंद।
मैंत बोदू भली बात, सोच कदु दिन रात।
मुरखू का संग साथ, ज्यान जोख्यूं पायेंद।
आँखु देखि सुणी जाणी, बटोरों मां माया लाणी।
जगत की गालि खाणी, विचारिययुं चाहेंद।
लगणु नी वैकी बाणी, जै की होन दुलि काणी।
पाछ पड़द खैंचा ताणी, ज्यान जोख्यूं पायेंद।

Harsh Puri