Ranu Raut Rawat Part 1

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सिरीनगर रन्द छयो, राजा प्रीतमशाई,
कुलावाली कोट मा, रन्दी रौतू औलाद।
हिंवा रौत को छयो भिवाँ रीत,
भिंवा रौत को छयो रण रौत।
रणू रौत होलो मालू मा को माल,
जैको डबराल्या माथो छ, खंखराल्या जोंबा,
घुण्डौं पौंछदी भुजा छन जोधा की,
मुंगर्याली फीली छन, मेरा मरदो।
माल की दूण रांजड़ा ऐन,
तौन कागली सिरीनगर भेज्याले।
रुखा रुखा बोल लेख्या तीखा लेख्या स्वाल।
बोला बोला मेरा कछड़ी का ज्वानू
मेरा राज पर कैन त यो धावा बोले?
मेरा गढ़वाल मा कु इनु माल होलू
जु भैर का मालू तैं जीतीक लालू।
तबरेक उठीक बोलदू छीलू भिमल्या,
ई तरई को माल होलो कुलवाली कोट,
हिंवा रौतन तरवार मारे।
रणू रौत् भी तरवार मारलो।
रणू रौत होलो तरवान्या ज्वान,
जैका मारख्वाल्या छन बेला,
जैका चौसिंग्या खाडू होला, खोल्या होता कुत्ता।
कुलावाली कोट को वो रणू रौत,
मेरो भाणजो मालू साधीक लौलो।
प्रीतमशाई माराज तब कागली लेखद,
हे बुवा रणू रौत तू होलू बांको भड़,

भात खाई तख, हात धोई यख,
जामो पैरो तख तणी बाँधी यख।
कागली पौछीगे रौत का पास।
तब बांचद कागली रौत-
शेर जसा मोछ छया रौत,
तैका मणि का मान धड़कन लै गैन,
तैकों हातू की मुसली बबलाण लै गैन,
कण्डील वंश को कांडो जजरान्द,
निरकुलो पाणी डाली सी हिरांद।
तब धाई लगौन्द रण राणो भिमला,
मैं त जांदू राणी सैणी माल दूण,
मेरा वासता पकौ निरपाणो खीर।
राणी भिमला तब कुमजुल्या ह्वैगे,
नयी नयी माया छै ऊँ की ज्वानी की,
नयों नयों ब्यौं छो?
राणी भिमला डाली सी अलस्यैगे।
छोड़दी पथेणा, नेतर रांग-सा बुन्द
मैं छोड़ीक स्वामी तुम जुद्धक पैट्या,
सुमरदो तब रौत देबी झालीमाली,
ढेबरा लुकदा, बाखरा लुकदा,
मर्द कबी नी रुकदा, शेर कबी नी डरदा,
लुबा जंगी जामा पैरेण लैग्या,
सैणा सिरीनगर ऐ गए रणू,
जैदेऊ माल्यान गर्दनी मालीक।
हे रौत आज को जैदेऊ त्वैक च बुवा।
तू छै मेरा रणू मालू मा को माल,
त्वैन मारणन बेटा त्वै चटा माल।

राजा को आदेसू पैक रौत चलीगे,
माल की दूण कुई माल बोदा-
ये तैं चुखनी  चुण्डला, आँगूली मारला
तब छेत्री को हंकार चढ़े रौत,
मारे तैन मछुली-सी उफाट,
छोड़े उडाल तरवार।
तैन मुण्डू का चौंरा लगैन,
तैन खूनन घट्ट रिंगैन मरदो।
तै माई मर्दू का चेलान मरदो,
सी केला सी कच्यैन, गोदड़ा सी फाड़ीन।
बैरी को नी रखे एक, ऋणना को-सी शेष।

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छीलू भिमल्या छयो रणू को मामा,
तै मामा को एक नौनो होलो झंक्रू।
झंक्रूहोलो मातो उदमातो,
राणियों को रौंसियो होलो वो, फूलू को हौंसिया।
रणू रौत की बौराणी भिमला पर
वैकी लगीं छै आँखी।
रणू तैं जुद्ध मा जायूं सुणीक
वो चली आये भिमला का पास।
सेवा मानी मेरी बौ भिमला।
ज्यू जागी दिऊर लाख बरीस।
धोलीन झंकरुन टलपला आँसू-
हे मेरी बौ, दादू मरीगे माल की दोण
तनी न वोल मेरा द्यूर झँकरु,
उ मालू मा का माल छन,

ऊं सणी कु मारी सकदो?
सची माण मेरी बौ भिमला।
मैं दादू की गति करि आयूं मुगति।
तब राणी भिमला कनी कदी कारणा?
छोड़दे पथेणा नेतर राँग जसा बुन्द
तब झंक्रू बुझौणी बुझौद-बौ,
मामा पुफू का भाई होन्दान, कका बड़ौ का दाई,
जनो माल दिदा छयो तनी मैं भी छऊं।
मैंन आज दादू का पलंका सूतो होण,
मैंन दादू की थाल ठऊँ जिमण।
एक बात बोली द्यूर हैकी ना बोली,
मैं शेरना की सेज स्याल नी सेवाल्दो,
मैं स्वामी की थाल कुत्ता नी जिमौंदू।
माल की दूण रणू रौत सूतो छयो,
झाबीमाली देबी वैका सुपिना चलीगे।
चचलैक उठे रणू झबकैक बैठे-
मेरी कुलावाली कोट कु चोरड़ा आइगे।
लत दिन रात कैक रणू घर पौंछे,
रात चौक मा तब तैको जोड़ो बजीगे।
जोड़ो बजीगे, घोड़ो खंकरैगे:
चोर जार कू नीन्दरा नी होन्दी,
झंक्रू का तरेण्डा टुटी गैन-
खड़ी उठ हे मेरी बौ भिमला।
भेर बजीगे माई को जोड़ो, घोड़ो खंकरैगे।
थरथर कम्पद झंकरू राम राम जम्पद-
अलै जाँदू बलै मेरी बौ भिमला।
मैं छनी आज बचौ।

Unknown, Laukik Gaathaen