Naagaraja Part 2

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Uttarakhand Naagaraja_Part_2 UK Academe

केको भाग लालो, केन करलो स्नान।
तब बोदा सांवल भगीवान-
तेरा बांजा वैराट मौसा, मैं चलदू बणौल।
यनी फैलाये भगवानन लीला-
गायों का करेन गोठ, भैसू का खरक
नन्दू का यख लगीन दूध का धारा।
दूध का लगीन, नाज का कोठारा।
बालपन मा ही बणी गये कृष्णा-
नन्दू को ग्वैरे, गायों को गोपाल।
गऊ चुगौंदू मोहन, वांसुली बजौंदू।
चला भाई ग्वैर छोरौं, मथुरा वृन्दावन,
बांसुली बजौला, कौथीक[करला।
तब बजाई कृष्णा त्वैन मोहन मुरली,
तेरी मुरली सुणीक कामधेनुन चरणो छोड़याले,
सभी ग्वैर छोरा मोहित करयाला।
कुन्दन शैर मंग तेरी मुरली सणी,
रुक्मणी रोज रंदी सुणन लगीं।
कोंपलू-सी फल-रुक्मणि सोना की-सी टुकड़ी।
ताल-सी माछी, सरप की-सी बच्ची।
सुण्याले तैंन मुरली अनबन भांती,
मन होइगे मोहित, चित चंचल।
भौ कुछ होई जाई मैंन मुरल्याक जाण।
एसी एकी बांसुली अफू कनू होलू?
पाणी की-सी बूंद की, नौण-सी गोंदकी,
तै दिन वा रुकमणि लैरेन्दी पैरेन्दी,
चलदी चलदी आइगे अघबाट।

 

 

कृष्ण भगवान इना रैन छली,
बीच बाट मां नदी दने उपजाई।
अफू ह्वैगे भगवान धुनार-सी लम्बो।
लुहार-सी कालो, भाड़ को-सी मुछालो
तबरेकरुकमणि भली बणीक बांद
तख मुंग एक बोलण लैगे-
हे धुनार छोरा तराई दियाल।
तराई क्या लेण छोरा तराई बोल्याल?
तराई क्या बेल्ण मैंन, भौं कुछ दियान।
जनानी की जात, डोंडा मा बैठीगे,
आधी गाड बीच कृष्ण भगवान
डोंडू खडू करयाले, पाणी मा छोड़याले।
हे धुनार छोरा, मैं पल्या छोड़ गाड।
पाल्या छोड़ लिजौलू त्वे, पैले तराई दियाल।
कनु छै तू धुनार, अधबीच तराई तू लेन्दू,
हजारू को धन दिउलू करोडू की माया।
सुण सुण रुकमणी हजारू को धन,
नी मांगदू, न करोड़ की माया।
जरा रुबसी घीचीन राणी मैं भेना बोल्याल।
हि रि रि कैक डोंडू लैगे बगण
डोंडू बगण लैगे, दिल लैगे डिगण।
तै दिन रुकमणि राणी रोंदी छ तुडादी
ये काला औधूत तैं मैं भेना नी बोलौं।
एक दिन संसार न मरी जाण,
त्वै क तैं मैं कभी भेना नी बोलौं।
डोंडा का डांड तैन ढीलो करीले,
रुकमणि को शरील पंछी-सी उड़ीगे।

ऐथर देखदी पेथर राणी,
हे भेना ठाकुर मैं पल्या छोड़ गाड।
गर्वियों का गर्व तोड़या त्वैन,
धजियों का तोड़या धज।
तब भगवान न हैको छदम धारे,
बणी गए प्रभु बांको चुरेड़।
हाथ मा धरयालीन चूड़ी अनमन भांति।
चूड़ी पैरयाला तुम स्वामियों की प्यारी,
राजमती चूड़ी होली, भानुमती छेको।
ढलकदी छणकदी रुकमणी औंदी,
बोल रे बोल चुरेड़, चूड़ियों को मोल?
तै दिन भगवान त्वैन वीं को हात पकड़याले,
राजौं की कन्या छई, क्या बैन बोदी:
हजारू को धन दिऊलू, करोडू की माया।
हे चुरेड़े तू मेरो हात छोड़ दे।
पैली मेरी चूड़ियों को मोल दियाल।
सुण्याल रुकमणि, तू मैं कू-
रुबसी घीचीन भेना बोल्याल।
नौनी रुकमणि रोंदी छ तुड़ांदी,
हेरदी छ देखदी राणी तब बोदी-
हे मेरा भेना, मेरो हाथ छोड़याल!
तब ऐगी रुकमणि मथुरा वृन्दावन,
देख कना ऐन गोकुल का ग्वैर।
सुण रुकमणि बोद कृष्ण भगीवान्-
बिना ब्यौ राणी त्वै नो रखदू।
कठा होई जावा मथुरा का ग्वैरू,
ई का साथ मेरो ब्यौ करी देवा।

 

 

ग्वैर छोरा क्वी बण्या बामण कुई औजी,
घैंट्या केला कुलैं का स्तंभ,
तै दिन तौंकू ब्यौ होई गये।
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पूतना रागसेण रदी कंस की बैण।
कना बैन बोदू तब दुष्ट कंगस-
कु जालू गोकल मेरा बैरी मान्यालो?
तब पूतना रागसेण बोदे-मैं जौलू गोकल मां!
तू मेरा बैरी मारी औली त पूतना,
त्वै मैं आदा राज द्योलो।
तब पूतना रागसेण तयार होये।
नहेन्दी व धुयेन्दी तब वा,
स्यूंद शृंगार तब सजौण लगदे।
तब धरे पूतनान मोहनी को रूप,
अपनी दूधियों मांज विष चारियाले,
रमकदी छमकदी जांदी पूतना रागसेण,
रौड़दी-दौड़दी गगे गोकुल का राज।
यसोदा का पास जांद मुंडली नवौदे।
तब पूतना रागसेण कना बैन बोदे-
मैन सूणे दीदी तेरो नौनो होये।
उंडो दे दी दीदी अपणा नौना,
तुमारो बालक दीदी, भलो छ प्यारो।
कृष्ण भगवान गोद मा गाडदे।
तब पूतना रागसेण लाड करदे,
हाती खुटी फलोसदी, घीची छ पेंदी।
कृष्ण भगवान जी दीनू का दयाल,
नरु का नारैन भक्तू का राम।
...

शब्दार्थ
शब्द अर्थ शब्द अर्थ शब्द अर्थ
कोठारा कुठार, भंडार नौण मक्खन खडू खड़ी
ग्वैरे ग्वाला लैरेन्दी सजी-धजी पल्या पार
कौथीक विनोद, कौतुक धुनार नदी पार कराने वाला पैले पहले
चरणो चरना मुछालो लकड़ी रुबसी सुन्दर
कोंपलू कोंपल तख वहाँ घीचीन मुँह से
माछी मछली मुंग पर भेना जीजा
अनबन असंख्य तराई पार करा हि रि हिर हिर करके
भौ चाहे दियाल दे बगण कहने
मुरल्याक मुरलीवाला कुछ जो-चाहे तुडादी बिलखती
अफू अपने आप डोंडा नाव धजियों शान वाले

 

 

शब्दार्थ
शब्द अर्थ शब्द अर्थ    
धज शान क्वी कोई    
चुरेड़ चूड़ीवाला औजी बाजे बजाने वाले    
धरयालीन रख दी घैंट्या खड़े किये    
राजमती राजकुमारियों कुलैं चीड़    
भानुमती सूर्य बैण बहन    
छेको चमक घीची मुँह    
छणकदी झूमती हुई पेंदी प्यार    
कठा इकट्ठा        
ग्वैरू ग्वाले        

 

Unknown, Krishan Sambandhee Lok-Gaathaen