Maloo Rajula Part 2

Uttarakhand Maloo_Rajula_Part_2 UK Academe

हैको गास छोड़े विरालीक तई।
तीसरो गास छोड़े अगनी का नऊ।
चौथो गास वो अफू भोरजन कर्द।
छोड़ याले तब साई न माता को थाल,
मालूशाही की माता झप अंगवाल मारदे।
तू जोगी नी छई तू छई बेटा मेरो।
किलै छोड़ी बेटा, सात राणी बौराणी?
किलै छोड़ी राजा अपणी रैत मैत?
नि छऊ माई मैं तेरो मालूशाही,
न मेरी राणी छई न मेरो राज।
मालूशाही माता दणमण रोन्दे:
तू बोल न बोल बेटा, तू मेरो मालू छई।
कनो निरमोही होई तु
कै पापीन भरमाई।
कंचन काया छै तेरी उजली आतमा,
केक बेटा त्वैन यो राखो रमाई?
मैं नी छऊँ मेरी माता, तेरो जायो,
मैं छऊं माता गुरू गोरख को चेलो।
तब गाडे जोगीन बोकसाड़ी विद्या,
वैई बगत मा वो अन्तर्ध्यान ह्वैगे
छोड़ तब्री रंगीली वैराट,
चली गए वो जलन्धर देस मा-
जलन्धर देस मा विषल्या का शैर।
वै शैर मा रन्दी छई वा राणी विषल्या,
जै राणी की छई विष की मगरी,

ऊ मगरियों मा विष चारियूं छयो,
जु तें पाणी पेंद छौं, विष खै मरी जांद छयो,
मालशाही जोगी पौंछीगे दोफरी का धाम,
विष की मगरी पाणी पीयाले।
जोगी तई तब विष लगो गए-
ढली गये वो चन्दन-सी गेंडो।
राणी विसल्या तब पाणी भरण ऐगे,
देखे वैन जोगी पड्यूं-
हात हात भर की जटा बेत बेत भर का नंग,
पर मुखड़ी पर वैकी बाला सुरज की उद्यों छौं
वीं स्वाणी सूरत भोली मूरत देखी,
वीं दया ऐगे।
लक लगाये वींन, विष गाडीयाले,
जीतो होई गए मरयूं मालूशाही
तनी जीती रयान सुणली सभाई।
तब बोलदी विषल्या रौतेली-
तुम मेरा नाथ साई, मैं तुम्हारी जोगीणा।
विसल्या मैं जाग जलन्धर देस,
जब घर औलू त्व विवै ल्यौलू।
रंगीली को राजा छऊँ, मैं रंगीली मालूशाही।
तिन मेरा पराण बचाया,
त्वै मैं विषल्या, भुलण्या नी विसरण्या।
हे जी, तब जांदू मालूशाही जलन्धर देस मा,
विघनी विजैपाल छा घट मू,
तब मिली गैन विधनी विजैपाल।
चार गारा मन्त्रीन साई न,
देखा दूं तब तौंका घटा बन्द होई गैन,
तब औंदन जोगी मू कये बिघनी विजैपाल,
हे भायों, केव घट बन्द होइन?
हे भाई, तू छई मातमी जोगी,
हमारा घट बन्ध्या गैन।
तु कुछ तन्त्र जाणनी त
हमारो कारज साधी ले।
अहा, ई किसम को साधू हम नी मिलणो?
तब बोलदो जोगी-हे विघनी विजैपाल,
राजुला न व्यायान, तुमन मारीइ जाण।
जोगी पौंछीगे तब राजुला का पास,
राजुलीन देखे रूपवन्तो साई,
कनू देखेन्द यो मालूशाही की तरौं।
मालूशाही बोल्द-राजुला रौतेली,
तेरा नौं को जोगी छौ, तेरा रूप को भोगी।
भौ कुछ होइ जान, मैन तू बेवैक ल्याणी।
तेरा बाना छोड़ी राजुला रंगीली बैराट,
तेरा बाना छोड़ी राजुला, राण्यों का भौन।
तेरा बाना छोड़ें राजुला, माता की माया,
तेरा बाना धरे जोगी को ध्यान।
आई गैन तबारे विघनी विजैपाल,
राजुला हमारी होली, तू जोगी कखन आयो?
विघनी विजैपाल छा बांका भड़,
ऊँ देखी पड़ कम्पदा छा, डाल्यों का जड़ला।
ऊँन तब जुद्ध शुरू करीयाले।
मालूशाही होलो बोक्सा को चेला,
कनी खोली वैन बगसाड़ी विद्या-
इना भैरव तब पैदा ह्वैन
जौन विघनी विजैपालू का कलेजा
कोरी-कोरी खैन।
एक नी ऊँन छोड़ीन विघनी विजैपाल,
गाबा सी काटीक, निमो मी निचोड़ीन।
तब प्रफूल ह्वैगे राजुला राणी,
तुम होला स्वामी मेरा पूर्वला का सांगाती,
मैं तुमारी छऊँ, तुम मेरा छतर।
तब सिंगार करदी राजुला रंगीली,
आँख्यों गाजल चढौंदी, माथा वेंदी
भली गाड़दी स्यू द पाटी, फूलून सजैक।
तब सजीगे वींको औला सरी डोला,
नौरंग मालूशाही छौ दस रँगी राजुला।
रंगीलो मालूशाही औंद रंगीली वैराट,
रंगीली वैराट मा जै जै होंद!

Unknown, Laukik Gaathaen